लव जिहाद और वामपंथी नैरेटिव: हिंदू नारीवादी विमर्शों से ही खतरे का मुकाबला संभव
हिंदू महिलाओं को आगे आकर फेमेनिज्म के नए विमर्श को अपने कँधे पर उठाना पड़ेगा। नहीं तो प्रिया चौधरी, हिना तलरेजा, निमिषा, प्रज्ञा देवनाथ जैसी लड़कियाँ सेक्स स्लेव, हत्या, बलात्कार और अवसाद का शिकार हो कर दम तोड़ती रहेंगी।
मेरठ में माँ-बेटी के ह्रदय विहीन क़त्ल ने एक बार फिर भारत में लव जिहाद के विमर्श को हवा दी है। 30 वर्षीय शादीशुदा युवक शमशाद ने अपना नाम छुपा कर पहले तो तलाकशुदा प्रिया चौधरी को प्रेम जाल में फँसाया और बाद में उसके नमाज पढ़ने में आनाकानी करने के कारण हत्या कर दी।
वीभत्स बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की गवाह पीड़िता की पाँच साल की छोटी बेटी को भी उसकी माँ के साथ ही मोहम्मद शमशाद ने मार कर घर में दफ़न कर दिया।
दूसरी घटना पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की है, जब गीता देवनाथ को अख़बारों के हवाले से सूचना हुई कि वर्ष 2016 में घर से जरूरी काम से बाहर गई बेटी प्रज्ञा देवनाथ (नया नाम आयशा जन्नत माहुना) बांग्लादेश के सबसे खतरनाक इस्लामिक आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) में जा कर शामिल हो गई है और बांग्लादेशी एजेंसियों की गिरफ्त में आने से पहले तक वह जमात के नारी वाहिनी में काम कर रही थी। आगे पढने के लिए क्लिक करें........
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